Tuesday, February 3, 2026

35 साल बाद इतिहास की एक चुप्पी टूटी।

 



🇮🇳
भारतीय सेना ने हाल ही में पहली बार आधिकारिक रूप से
‘ऑपरेशन पवन’ (IPKF, 1987–90) के शहीदों और वीरों को श्रद्धांजलि देना शुरू किया है।
यह निर्णय उस अध्याय को दोबारा प्रकाश में लाता है,
जिसमें 1,171 भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था।
यह केवल एक सैन्य औपचारिकता नहीं,
बल्कि उन हज़ारों परिवारों के लिए सम्मान और सुकून का क्षण है
जिन्होंने वर्षों तक चुपचाप प्रतीक्षा की।
राजस्थान के छापूड़ा कलां (शाहपुरा) से भी
इस ऐतिहासिक क्षण का एक मानवीय जुड़ाव सामने आता है।
Ex-Havildar जगदीश प्रसाद स्वामी
Corps of Signals | Sri Lanka Deployment (1988–89)
ऑपरेशन पवन के दौरान, जब ज़मीन पर हालात अत्यंत चुनौतीपूर्ण थे,
तब संचार व्यवस्था (Signals) को बनाए रखना
अनुशासन, धैर्य और पेशेवर निष्ठा की परीक्षा थी।
यह सेवा बिना किसी शोर के निभाई गई—
जैसा कि भारतीय सेना की परंपरा रही है।
आज जब IPKF को इतिहास में दोबारा स्थान मिल रहा है,
तो यह अवसर उन सभी सैनिकों को स्मरण करने का है
जो आज भी हमारे बीच हैं।
यह समाचार किसी मांग या विवाद से नहीं,
बल्कि स्मृति, सम्मान और राष्ट्रीय कृतज्ञता से जुड़ा है।
जय हिंद 🇮🇳
छापूड़ा कलां, शाहपुरा (राजस्थान)

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